दास्तान उस शाम की!

दास्तान उस शाम की,
तेरी तस्वीर बता रही है,
और जो कुछ रह गया,
ये नज़रे जता रही है।

याद है आज भी, तुझको
हर लब्ज़ जो उसने बोला था,
तेरी तारीफ के सिवा, शायद
उसने कुछ और ना कहा था।

तसव्वुर करते ही तेरा, उसने
होश तो जरूर खोया होगा,
जिस जैकेट पर, रखा तूने हाथ,
यकीनन आज तक ना धोया होगा।

तेरे बालो की सौंधी खुशबू,
महकती होगी, उस महफिल में,
रोज लगाते होंगे चक्कर, के काश
दीदार हो जाए तेरा, एक बार फिर से।।

देव

25/10/2020, 8:37 pm

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