कुछ मचल गई, थोड़ी ठिठक गई,
देख अपने सजन को, गोरी थिरक गई।
थोड़ी बल खाके, थोड़ी इतरा के,
नज़रे झुकाए, थोड़ी शरमा के,
देख अपने सजन को, गोरी निकल गई।
थामे हाथ पिया, तो धड़के जिया,
सांसों की हवा, लाए तूफान बड़ा,
बनी जल तरंग, चूड़ियां बज सी गई।
कासे वो कहे, क्या क्या वो कहे,
उसकी कौन सूने, कौन यकीं करे,
बैठ आईने के समीप, सब कहती गई।
कुछ मचल गई, थोड़ी ठिठक गई,
देख अपने सजन को, गोरी थिरक गई।
देव
20/11/2020, 9:47 am