जब तू नहीं शहर में, नहीं किसी से मैं मिला।

ढूँढा किए मैं तुझको, पल को ना मिल सका,
जब तू नहीं शहर में, नहीं किसी से मैं मिला।

इन पत्थरों के, आलीशान बंगलो में,
कहां बची है जान, जब तू ही नहीं,
तूने जो छोड़ा शहर, मैं शहर से चला।
जब तू नहीं शहर में, नहीं किसी से मैं मिला।

रास्ते है सूने, सूनी है सारी गलियां,
बगीचों में गिर रही है, अधखिली कलियां,
तू खुशबू लें गई, मैं बेइत्र रह गया।
जब तू नहीं शहर में, नहीं किसी से मैं मिला।

ढूँढा किए मैं तुझको, पल को ना मिल सका,
जब तू नहीं शहर में, नहीं किसी से मैं मिला।

देव

20/11/2020, 12:13 am

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