मैं, मैं कहाँ, जो तुम नहीं।।

तुम हो ना, तो बेफिक्र सा हूँ मैं,
पास नहीं, मगर ज़हन मे सही।
हाँ, जब व्यस्त हूंँ, तो
बस व्यस्त रहता हूँ मैं,
मगर जब मैं, मेरे साथ हूंँ,
बस तुम्हे सोचता हूंँ मैं।
लोग कहते है, बदल गया हूंँ मैं,
अक्सर, खुद मे मशगूल रहता हूंँ मैं,
मगर, मैं, मुझ में समाई तुम से,
गुफ्तगू करता रहता हूंँ मै।
मैं खुश हूंँ, क्यूं कि मैं ही तुम हो,
तुम हो, तो इन पंक्तियों में मैं हूंँ,
ये पंक्तियां कहा, जो तुम नहीं,
मैं, मैं कहाँ, जो तुम नहीं।।
देव
24/01/2021, 11:00 am

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