मेरी जिन्दगी कि नसीहत है।।

इश्क़ यूँ ही नहीं, कि थम जाए,
दो पल में हो जाए या मिट जाए।
तू खुदा की इनायत है,
खुदा वही है, जहां मोहब्बत है।
कैसे भुला दू, तुझे यू ही,
मेरे ज़हन में, तेरी रवायत है।
तू कैफियत है, तू खेरियत है,
मेरी जिन्दगी कि, तू नसीहत है।।
देव
27/01/2021, 6:47 am

Leave a Reply