अच्छा दोस्त समझती है

बुरा तो लगता है, जब वो मुझसे,
मुंह फेरती हो, औरो से बात करती है,
भूल गया था मैं, मुझे बस,
अच्छा दोस्त समझती है,
और मैंने तो इश्क़ किया है, उससे,
और उसने ही तो बढ़ने दिया है इसे,
अब फिर से, उसी मोड़ तक आने में,
कुछ घड़ियां लगती है।।

देव

सही और ग़लत

सही और ग़लत के बीच में,
अटकी है सोच कहीं,
शायद, भ्रम ही है,
जो अक्सर गुमराह करता है,

मोहब्बत और नफ़रत,
बस, सुई भर की है दूरी,
बस, दिल ही है,
जो कुछ करने नहीं देता है,

बेकरारी और लाचारी,
दोनों कब है साथ में,
बस, वक़्त ही तो है,
जो साथ नहीं देता है।।

देव

वक़्त कम क्यूं पड़ता है

किसी के लिए तन्हाई है,
किसी का एंकात कहलाता है,
घरों में बंद है लेकिन,
दिल कहा टिक पाता है।

कोई रुसवाई पीता है,
कोई खुशहाल जीता है,
घरों में बंद है लेकिन,
जमाना पूरा दिखता है।

कोई मगरूर है यहां पर,
कोई महशूल है यहां पर,
घरों में बंद है लेकिन,
वक़्त कम क्यूं पड़ता है।

देव

जो बोली ज्यादा लगता है, अब वही प्यार पाता है

अब कहा प्यार दिल से होता है,
पहले, प्रश्नों का पर्चा, तैयार होता है,
जात पात, तो मिटा दी है मगर,
बैंक बैलेंस अहम किरदार होता है,

कितना कमाते हो, क्या बचाया है,
मां बाप साथ तो नहीं रहेंगे ना,
सबसे ज्यादा, मुझे प्यार करोगे ना,
गिफ्ट के टैग से, मोहब्बत को नापा जाता है।।

मोलभाव किया जाता है,
नीलाम किया जाता है,
जो बोली ज्यादा लगता है,
अब वही प्यार पाता है।।

देव

ये लोकडाउन तो खुल जाने दो

रुको जरा, ये लोकडाउन तो खुल जाने दो,
जरा, मेरे किचेन में, कुछ और ,
सामान तो आने दो,
थोड़ा, यारो को मेरे घर तो आने दो,
दो चार पेग, मिल बैठ कर लगाने दो,
फिर से वहीं महफ़िल,
वही रंगत जम जाने दो,
तब तक, बस तब तक ही सही,
कुछ तुम बनाओ,
कुछ हम बनाए,
वक़्त कम कम ही रहा है,
इंतेज़ार का,
आओ, थोड़ा हस ले,
थोड़ा गाए।।

देव

तुझे हद से ज्यादा, प्यार करूं

ख्वाब तेरे, सच मैं करू,
तुझे हद से ज्यादा, प्यार करूं,

तेरे सपने, मेरी मंजिले,
तेरी मंजिलों को, मेरे रास्ते, का
मैं चलता ही रहूं,
मैं चलता ही रहूं,
तेरे वास्ते,
तेरे वास्ते,

ख्वाब तेरे, सच मैं करू,
तुझे हद से ज्यादा, प्यार करूं,

तू मिली, जिंदगी मिली,
तू नहीं, तो क्या जिंदगी,
तेरा इंतजार, करता रहूं
तेरा इंतज़ार, करता रहूं
मेरे वास्ते
मेरे वास्ते,

ख्वाब तेरे, सच मैं करू,
तुझे हद से ज्यादा, प्यार करूं।।

देव

स्त्री पुरुष की समानता

कहने को तो बात, समानता की है,
स्त्री पुरुष की समानता,
और में भी हूं, यही मानता,
मगर, फिर भी इतना अंतराल क्यूं है।

करेक्टर गर खराब है,
तो खराब है, क्या कहे,
मगर पुरुष को करे बोल्ड,
और स्त्री को बोल्ड कहना क्यूं है।

जो बात, गलत है,
उस बोलना ही क्यूं है,
मगर, पुरुष को बोलना आम है,
और स्त्री पे बवाल मचता क्यूं है,

दहेज, एक नपुंसकता है,
स्त्री से मांगा जाए तो सजा,
मगर, पुरुषों से अब भी,
कितना कमाते ही, पूछा जाता क्यूं है।

क्यूं नहीं, स्त्री में पौरुष्य,
और पुरुष के स्त्रीत्व को निखारा जाए,
एक दूसरे को, एक दूसरे के,
वास्तव में समान माना जाए,

जो है, पर नहीं दिख रही, बुराइयां,
उसे नए प्रयासों से मिटाया जाए,
एक नया आयाम, नई राह
इस समाज को दिखाई जाए।।

देव

सुबह, कितना सिखाती है

सुबह, कितना सिखाती है,
ये हर रात के बाद आतीं है,
ख्वाब, जो देखें थे रात में,
बुनने का, जरिया बन जाती है,

सुबह, हर रोज आती है,
आशाएं, नई लाती है,
सूरज की पहली किरण से पहले,
जीवन में उजाला लातीं है,

सुबह, मुझको बताती है,
जो हुआ, वो कल था,
आज, फिर मिला है तुझे,
उठ, बड़, कर कुछ नया।।

देव

उन दरखतो से पूछो,

उन दरखतो से पूछो,
इंतेज़ार क्या होता है,
हर साल, सावन के,
इंतेज़ार में, महीनों गुजारते है,
चिलचिलाती धूप में,
कुछ सूख जाते है,
लेकिन, खड़े रहते है,
अपनी जगह, बस
इक आस में,
आज नहीं तो कल,
फिर खिलेंगी,
कोपुल मुझ पर,
घनी बरसात में।

देव

कागज की कश्ती ही तो

कागज की कश्ती ही तो,
बन गई ये जिंदगी,
जरा सी जोर की हवा भी,
डूबने का सबब बन जाती है।

तूफानों में क्या जाऊं,
लेकर हाथ में, लौ दिए की,
या तो बुझ ये जाएगी,
या जला देगी, सब अरमा।

देव

शायद, वो यारी कहीं छूट गई है

कभी होती थी, विशाल इमारतें यहां,
अब तो खंडहर बन गई है,
बड़ी बड़ी दीवारों को, जोड़ने वाली,
वो छोटी छोटी दीवारों, कब की ढह गई है।

अब कहा मिलती है, खुशबू,
चमेली, मोगरे, गुलाब के फूलों की,
ऑने कोने में उगे है झाड़,
आंगन की जगह,
इमली और बंबूल ने ले ली है,

इतने बड़े दिल लेकर,
अपनी शामे, साथ गुजरने वालो,
क्या हुआ, लगता है,
विश्वास और प्यार की कड़ी,
जो कभी, अटूट कहीं जाती थी,
वक़्त के साथ कमजोर हो गई है,
शायद, वो यारी कहीं छूट गई है।।

देव

कुछ लम्हे, जिंदगी के

कुछ लम्हे, जिंदगी के,
कुछ बाते, दिलो की,
कुछ अनकहे किस्से,
हम बांट लेते है,

ना परवाह, जमाने की,
ना फिकर, अपने कल की,
थोड़ा सा हंस लेते है
थोड़ा हसा देते है

गर , थोड़ा गुस्सा भी ही जाए,
तो मना भी लेते है
हम दोस्त है, यू ही अपनी
जिंदगी, मस्ती में गुजार देते है।।

देव

स्त्री भी, स्त्री को अपशब्द कहे

तू है तो अस्तित्व मेरा है,
और तू अपना अस्तित्व ढूंढ रही है,
जाने, कैसी ये परीक्षा की घड़ी है,
जो सदियों से चल रही है,

सीता ने कब चाहा,
रावण उसका हरण करे,
एक राक्षस के वध के लिए,
नारी, क्यूं अपमान सहे,

क्यूं कंस का अंत, था करने को,
देवकी इतना दर्द सहे,
क्यूं नहीं जन्मे कृष्ण,
पहली संतान का रूप धरे,

क्यूं द्रोपदी यू ही बांटी गई,
बस, एक बात के कहने से भला,
गलती पांडवो के करने पे,
क्यूं भला वो अपमान सहे,

कहते है वक़्त है बदल चला,
स्त्री का सम्मान है वापस मिला,
फिर भी क्यूं आज भी देखो ज़रा,
स्त्री भी, स्त्री को अपशब्द कहे।।

देव

कोई मेरा भी हमसफ़र

चाहे, इक दूसरे से, बहुत
अलग, नजर आते है, मगर
समंदर और आसमा,
भी मिल जाते है इक छोर पर,

तकती रहूं, ये नज़ारा,
बस यूं ही उम्र भर, मगर
कर रहा होगा, इंतेज़ार कहीं,
कोई मेरा भी हमसफ़र।।

देव

कुछ तो कसूर, तेरा भी रहा होगा

तेरी बांते, तुझसे मुलाकाते,
तेरी यादों में बिताई, वो जागी रातें,
तेरी वो मंद मंद मुस्कान,
सुरीली आवाज में, गाया वो गान,
मेरी बातों पे, चुटकियां कसना,
और फिर, खुलकर तेरा हसना,
यूं ही नहीं मोहब्बत हुई तुझसे,
कुछ तो कसूर, तेरा भी रहा होगा।।

देव

खूबसूरती की मिसाल

खूबसूरती की मिसाल, उससे शुरू,
और उसी पर खत्म होती है।

मुझसे, उम्मीद ना करना, अब नहीं,
किसी और की तारीफ होती है।

लिखे है नगमे, कई उसके हुस्न पर,
मेरी किताब, नाम से उसके, भरी होती है।

अहम है, उसकी जगह, जिंदगी में मेरी,
शाम उससे अलविदा, लेकर ख़तम,
सुबह खुदा हाफ़िज़ कह उसको, शुरू होती है।।

देव

लगता है, प्रकृति खुश है आज

ये सौंधी सौंधी खुशबू,
मेरी मिट्टी की,
ये फुहारों में लिपटी हवाएं,
पेड़ की हिलती टहनियों,
से आता संगीत,
और मकानों के दर्रो से,
छन कर आता संगीत,

बड़ी हसीन सुबह है आज,
लगता है, प्रकृति खुश है आज,
बस नाच रही है,
मगन होकर अपने में,
काश रही है देखो,
कितनी हसीन हूं मैं,
जब तुम है दड़बो में।।

देव

कहते है, इश्क़ लाचार है, कमजोर नहीं

मुझे अपनी मोहब्बत पर, कोई अफसोस नहीं,
और तुझे पाने का, मुझे कोई जुनून नहीं,
गर चाहेगी मुझे तो आयेगी, इक दिन तू ही,
कहते है, इश्क़ लाचार है, कमजोर नहीं।।

देव

Random thouths

[26/04, 4:19 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: काश! इन आसुओं की कीमत होती,
ना बहते, यूं ही, अक्सर रातो में,
काम आ जाते, इश्क़ के बाजारों में।।

देव
[26/04, 11:18 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: ये तो यकीं है, मोहब्बत है तुझे भी, मुझसे,
बस, तू जहान की बातों में, वक़्त जाता करती है।।

देव
[26/04, 11:18 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: अब तो बस दो शब्दो में दुनिया सिमट गई मेरी,
ना वो, कैसी हो, का पूरा जवाब देती है,
ना मैं, ठीक हूं, के सिवा, कुछ और कह पाता हूं।।

देव
[26/04, 11:18 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: यूं तो तू कहती है, पता नहीं मोहब्बत क्या होती है,
मगर, ये कैसे जाना, तू मुझसे, इश्क़ नहीं करती है।।

देव
[26/04, 11:23 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: यूं तो वो, बहुत समझदार है, पर
खुद को समझे, ये हो ना सका।।

देव
[26/04, 11:26 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: साफ दिख रहा है, ये कश्मेकश,
बस दिमाग और दिल की है,
दिल जो कह रहा है, दिमाग
सुनने के काबिल ना रहा।।

देव
[26/04, 11:27 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: बेजान पत्थरों में जान फुक कर,
वो कहते है, फिर पत्थर बन जाओ।।

देव
[26/04, 11:30 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: बादल भी मेरा दर्द समझ रहे है,
बरसते हुए, उसकी ओर, बह रहे है।।

देव

[01/05, 9:09 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: मेरे दरवाजे पर, उसने आज दस्तक दी,
कहा, वक़्त हूं, अपना ले, या निकल जाऊंगा।

देव
[01/05, 9:11 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: ना तू पूरी है, और अधूरा मैं भी हूं,
फिर ये हिसाब काहे का।।

देव

मेरी जेब में, कुछ सिक्के कम थे

बहुत प्यार किया उसको, मगर,
उसका प्यार पा ना सका, क्यूं कि,
मेरी जेब में, कुछ सिक्के कम थे,
उसके प्यार के, चर्चे बहुत थे,

हां, बस चंद सिक्के ही तो कम थे,
और भला, वो मुझे क्यूं चाहती,
उसने तो पहले भी कहा था,
उस अमीर पसंद है,

और मैं कहा जानता हूं, मतलब,
अमीरी का, तरजीह दी है प्यार को,
ना किया हिसाब मोहब्बत का,

और वैसे भी, प्यार बिकता होगा,
बाजारों में, यह तो, प्यार की कीमत,
बस प्यार से चुकाई जाती है,
प्यार के लिए, जहान क्या,
जान पल में, दे दी जाती है।।

देव

कहा था ना, ना करो इश्क़,

बस, इतना ही सफर है,
इतना ही साथ हमारा,
मंजिले हमारी, अनजान बहुत है,
बड़ना तो, दोनों को है आगे,
पर रास्तों में, अलगाव बहुत है,

सबब जिंदगी का, अलग,
बना बैठे है हम लोग,
मोहब्बत के पैमाने, अलग
बना बैठे है हम लोग,

कोई शोहरत का दीवाना,
कोई रंजो गम का,
कोई नफ़रत चाहता है,
कोई बगावत,
कोई माया में है फंसा,
कोई माया में,

इश्क़ में भी तो दिमाग,
लगा बैठे है हम लोग,
दिल को तो कभी का,
भुला बैठे है हम लोग,

कहा था ना, ना करो इश्क़,
टूट जाओगे,
महफ़िल तो क्या, बाज़ार में भी,
खुद को तन्हा पाओगे।।

देव

सैलरी स्लिप देखा जाता है।।

पैसा, आज पहली बार पता चला,
कितनी importance है इसकी लाइफ में,
नहीं हो हद से ज्यादा, अधूरी रह जाती है,
मोहब्बत को पाने, की ख्वाहिशें।

और ऐसा नहीं, कि तुम जिसे चाहोगे
बस वही, उम्मीद जताएगी,
तुम्हे जो चाहेगी, वो भी एक दिन,
पैसे की ही डिमांड ले कर आएगी।।

कहने को तो वक़्त, equality का आया है,
जहां देखो, लोगो ने मोर्चा सम्हाला है,
दहेज को, सबसे बड़ी बुराई बताया जाता है,
मगर, आज भी, शादी के लिए,
सैलरी स्लिप देखा जाता है।।

देव

हां, अब वो प्यार से डरती है।।

वो अपने जज्बात
मुझसे छिपाना चाहती थी,
जो नहीं बता सकती थी किसी को
वही बात मुझसे करना चाहती थी,
अपने अल्फजो को, बड़े
नाप तोल कर बोल रही थी वो,
आज, फिर एक बार, अपना
दर्द बयां कर रही थी वो,

वैसे तो कह रही थी, अब,
जख्म भर चुके है,
दर्द नहीं होता है
पागल, इतना भी नहीं समझती है,
आदमियों के भी दिल होता है,
मुझे भी टीज सी उठती है,
जब तुम्हारा कल याद करता हूं,
अब तो आंखे भी भर आती है,
अक्सर, जब तुम्हारी वो,
तस्वीर देखता हूं,

दिखने में तो वो ,
खुश बहुत लगती है,
मगर उसके अल्फाजो में,
उसका दर्द झलक रहा था,
टूटे हुए सपनों का,
ढेर दिख रहा था,
वो आंखो में कटी रातें,
वो रातों में बहे आंसू,
थामे कलेजे के टुकड़े को,
खुद से करती रही, जो बाते,
वो दिखाने के लिए ली,
सुबह की अंगड़ाई,
वो रसोई में, खोए हुए,
जब अंगुली जलाई,
वो सूना दिन,
कहने को अपना, मगर
अनजान, घर में बीती शामें,
उनके कभी कभी,
घर आने पर,
फिर वही घिसी पिटी बातें,
अपनों को दिए उलाहने,
सपनो को तोडते बहाने,
और प्यार, भूल ही गई थी वो,
प्यार होता क्या है,
कोई ऐसा भी होता है,
जिसके लिए दिल रोता है,
या बस ये सब किताबों में होता है,

बस, बहुत हुआ, अब,
और ना सहा उसने,
बेडियों को तोड़, आंगन
के बाहर पग रखा उसने,
अपनों की ही बातों को,
काफी सहा उसने,
कर फिर कभी,
उस शख्स को,
ना देखा उसने,
अनजान शहर में,
घरौंदा किया उसने,

मगर, बहुत कुछ टूट चुका था,
उस फिर संवारा उसने,
बटोर कर, कुछ ख्वाब को,
जीवन में उतारा उसने,
एक नए रूप के साथ,
नई पहचान भी ली,
दफ़न कर, दर्द भरी रातें,
चेहरे पर है हंसी खिली,
मगर, आज भी कुछ,
टीज सी उठती है,
अब वो प्यार से डरती है,
हां, अब वो प्यार से डरती है।।

देव

मुकम्मल हो जहां तेरा

मुकम्मल हो जहां तेरा,
यही ख्वाहिश है, बस मेरी,
ख्वाब तूने, जो देखे है,
तेरी तकदीर को मिल जाए।

फलक के सितारों से, ज्यादा,
खुशियां झोली में तेरे हो,
चांद खुद रोशनी करने,
तेरे दर पर आ जाए।

देव

क्यूं ना ताउम्र, इश्क़, बस इश्क़ करते रहे

उसने कहा, अंडरस्टैंडिंग और केयरिंग,
के मायने पल में ख़तम हो जाते है,
जब, एक लड़का, और एक लड़की,
रिश्तों में बंध जाते है,

पर रिश्तों में बांधना क्यूं है,
मोहब्बत को ख़तम करना क्यूं है,
समाज के दिए नाम, बस रहने दो समाज तक,
मुझे मुझसे, तुम्हे तुमसे, दूर करना क्यूं है,

क्यूं ना, बस, एक दूसरे का हाथ थाम ले,
रास्ते लंबे है, बस साथ में चलते चले,
वादे और कसमे तो अक्सर टूट जाते है,
क्यूं ना ताउम्र, इश्क़, बस इश्क़ करते रहे।।

देव

उनसे मिली है, चांदनी मेरी

है जेहन में तू बसी,
तेरा दीदार, हर पल करू,
जब दिल में तू बसी,
तेरी तलाश, क्यूं करू,

खुशबू तेरी आती है,
हर बागबान से,
तेरी आवाज़ मिलती है,
कोयल की राग में,

बादल लाते है, खबर तेरी,
बारीशें आहटे तेरी,
चांद कह रहा था इक दिन,
उनसे मिली है, चांदनी मेरी।।

देव

जब तू होती है सामनेथोड़ा हंस लेता हूं।।

तेरी याद में अपनी, रातें
नीलाम करता हूं, मगर,
जब तू होती है सामने,
मैं थोड़ा हंस लेता हूं,

यूं तो, अक्सर, आंखे
भी नम हो जाती है
छुप कर, जमाने से,
रो लेता हूं, मगर,
जब तू होती है सामने
थोड़ा हंस लेता हूं,

तेरे अरमान, पूरे हो सारे
खुदा से, ख्वाहिश यही है
मैं नहीं हूं तेरे सपनों में
यही अफसोस करता हूं,
जब तू होती है सामने
थोड़ा हंस लेता हूं

आज फिर, देखा तुझे
उस छोटे से झरोखे से,
तेरी मुस्कान ने, छुपा
रखे थे, सारे गम तेरे,
दो आंसू मुझे भी आए,
चुपके से, मगर
जब तू होती है सामने
थोड़ा हंस लेता हूं।।

देव

रात का आलम

आज रात का आलम भी,
कुछ और था,
ना वो, वो थी, ना मैं, मैं था,
कुछ बिखरे हुए पन्नों को,
सम्हालने में, तू भी,
और में भी, मुगशूल था।।
देव

जहा से चला था, वही, खुद को खड़े पाया है

आज फिर वही दौर,
लौट आया है,
जहा से चला था, वही,
खुद को खड़े पाया है,

बेफिक्र, बिंदास हुआ,
करता था कभी,
बेकार की बातों में,
गुजरता था दिन,

अनजान से शहरों में,
सबको पर भटकना,
कोई तो मिले अपना,
बेसबर होकर ढूंढ़ना,

फिर तुम मिले, लगा,
मंजिल मिल गई,
जो थी जिंदगी, वो
वैसी ना रही,

थोड़ी खुद से भी,
मोहब्बत हो गई,
जीने की और,
चाह हों गई,

मगर, बस एक पल में,
टूटे ख्वाब, बिखरी मंजिले,
मुंह मोड़ कर , वो
पल में चल दिए,

आज फिर वही दौर
लौट आया है,
जहा से चला था, वही,
खुद को खड़े पाया है।।

देव

मैं हूं आवारा

अब तो आदत सी हो गई है,
टूटने और फिर जुड़ने को,
और ऐसा नहीं, कि तोड़ा हो,
बहुत ने मुझे,
जिसे समझ अपना,
उसी ने खिलौना समझा,
जब तक था काम का रखा,
फिर फेंक दिया,

दिल तो पहले भी टूटा है,
मगर इस बार कुछ यूं टूटा,
वो भी रोती रही, और
बहुत मैं भी रोया,

जख्म अभी हरे है,
ना पूछना हाल मेरा,
ना करना इश्क़ भी मुझे,
मिलेगा दिल ना मेरा,

उसके आहिस्ता आहिस्ता
चलने की जिद में,
ना मैं, मैं रहा, ना
ना उसका बन पाया,

कसूर उसका नहीं,
वक़्त का है सारा,
वो जो है, नहीं रही
आज वो जो थी कभी,

शख्शियत पर मेरी भी
अंगुलिया है हजार उठी,
उसको यकीं है औरों पर,
मुझसे कहीं ज्यादा,

क्या कहूं उसे,
दुआ है, बस खुश वो रहे,
मुझ पे लगा है ठप्पा,
मैं हूं आवारा।।

देव

मंजिल कैसे पाओगे

रोक दो काफिले दर्द के, आगे क्यूं कर ले जाओगे,
दर्द बांटोगे, गर तो, दर्द ही पाओगे।

बहुत खुदगर्जी, हो गई, अब तो सुधर जाओ,
नफरतें दिल में रखोगे, तो प्यार कैसे पाओगे।

चिराग भी बुझते है, दिखा कर रास्ता इक दिन,
आंखे जो ना खोलोगे, तो मंजिल कैसे पाओगे।

देव

Confusion

लडकियां सही है, जो चाहती है,
बड़ा, क्लियर होता है,
हम बन्दों की लाइफ में बड़ा कन्फ्यूजन होता है,

साल, शुरुआत होते ही हो जाती है,
जब हम लड़कियों की ड्रेस, पहनाई जाती है,
और फिर क्या बनेगा, कुछ करले कह कर,
हर रोज हमारी ली जाती है,

सच कह रहा हूं, बड़ा प्रेशर होता है,
जैसे, लास्ट मिनट में,
टॉयलेट अंदर से लॉक मिलता है,
हाल कैसा भी ही, पड़ने का,पैरेंट्स को,
ख्वाब, डॉक्टर इंजिनियर का दिखता है।

यही कन्फ्यूजन आगे भी चलता है,
जिसे चाहते हो, वो देखकर हमे,
मुस्कुराती भी है, आप बहुत अच्छे हो,
I like you, जैसी बांते बोल जाती है,
मगर, जब इजहारे ए इश्क करते हो,
मुझे वक़्त चाहिए,
मैंने तुम्हारे लिए ऐसा सोचा नहीं, ,
अरे हम तो दोस्त है,
पर सोच कर बताऊंगी,
जैस बहाने बनाती है,
लेकिन एक बार भी सीधे ना नहीं कह पाती है,

और हम है, कि एक हां या ना, सुनने की खातिर,
बस वही रुक जाते है,
जिंदगी आगे निकल जाती है
हम पीछे छूट जाते है।।

देव

राधा को असमंजस में पाऊ

बैर करू, कि प्रेम करू,
राधा को असमंजस में पाऊ,
कृष्ण चले, मथुरा की ओर,
अब कैसे में समझाऊं,

मैं तो सखी हूं, पर जानती इतना,
विरह की बेला, अब आईं,
कैसे राधा, रहेगी अब जब,
कृष्णा नहीं, देख पाएगी,

अश्रुधारा बह रही झर झर
दिखती राधा, है कितनी बेबस,
एक तरफ प्यार, है रोके उसको,
कृष्णा का रूप, ना दिखता है उसको,

हरी जाने, सब मन की बातें,
चले आए करीब, मंद मंद मुस्काते,
अंगुलियों में ले, अश्रु की बूंदे,
बड़े मधुर से, बचन ये बोले,

राधे! क्यूं बहाती हो अश्रु की धारा,
मैं था भी तुम्हारा, रहूंगा तुम्हारा,
पहला हक तुम्हारा ही आवे,
चाहे कृष्णा कितनी रास राचावे,

मुझमें बसा प्रेम, तुम है तो हो,
मुस्कान मेरी, प्राण तुम ही तो हो,
नाम मेरा अधूरा है तुम बिन,
जिव्हा पर सबके, मुझसे पहले तुम हो,

मैं भी तुम हो, मुझमें तुम हो,
जहा हूं मैं, हर जगह भी तुम हो,
विरह नहीं, ये मिलन हुआ है,
सदियों का ये, प्रेम हुआ है,

राधा, बस तकती रहती है,
असमझी थी, अब समझी है,
दो शरीर है, एक ही मन है,
कृष्णा राधा है, राधा ही कृष्ण है।।

देव

कृष्ण राधा संग रास रचावे

ठुमक ठुमक कर, कमरिया हिलावे,
कृष्ण राधा संग रास रचावे,

देखो, प्रभु, कैसी लीला दिखावे,
गोपी बन, गोपी संग नाचे,

प्रेम का एक, नया रूप दिखावे,
राधा के प्रेम में, राधा बन जावें,

श्याम रंग अब कैसे छिपावें,
राधा से झट, पकड़े जावे,

लख लख नए, बहाने बनावे,
गोपियों से देखो, सजा भी पावें,

प्रेम का जाल, कृष्ण बिछावें,
प्रेम के आगे, खुद झुक जावे।।

देव

Random thoughts Apr- 2020

[01/04, 10:56 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: वो कहते है, ये फ़ैमिली रियूनियन का वक़्त है,
मगर इंटरनेट क्यूं ठप है।।


[03/04, 3:15 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: इक इक मनका, नाम तेरा,
हर सांस में है, तेरी आस,
मिल जावे तू, गर जो मुझको,
पूरी हो, मेरी जन्मों की प्यास।।


[04/04, 7:41 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: समझाओ उन्हें, खुदा पत्थर ही में नहीं,
दिल में भी बसता है,
और तराशे क्यूं, वो हर हाल में,
खुदा ही लगता है।


[05/04, 5:39 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: कहां नींद आती है आजकल,
रातें हमारी नीलम है, इश्क़ के बाज़ार में।।


[05/04, 5:42 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: कहां नींद आती है आजकल,
रातें हमारी नीलाम है, इश्क़ के बाज़ार में।।


[06/04, 1:23 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: गर समन्दर खुदा है, तो मजा है,
अपना अस्तित्व खोने में,
वरना क्या रखा है।।


[06/04, 4:37 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कहने को तो है अजनबी,
पर लगते अपने है,
जानते है, बहुत खूब, चाहे
मिलने में बरसो लगते है।।


[08/04, 1:16 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: शुक्र है, कुछ पल ही सही,
वो आती तो है,
महफ़िल में आजकल,
वरना, गुमसुम सा गुजरता है दिन, तन्हा गुजराती है, राते आजकल।।


[08/04, 1:16 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: रात भी रुखसत कहा, कहती है आजकल,
उसके दीदार को, तरसती है आजकल।


[08/04, 1:16 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: चांद भी शर्मा कर, बादलों में छुप जाएगा,
मेरा यार, जब पर्दा, चेहरे से हटाएगा।।


[08/04, 1:20 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: उसके होने की, वजह, मेरी जिंदगी बन गई,
वो दूर है बहुत, करीब दिल के, हर वक़्त रही,


[08/04, 1:26 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: अल्फाजों को, कुछ यूं कहा,
के जान डाल दी,
कितनो की, तेरी आवाज़ ने,
जां निकाल दी,


[08/04, 11:37 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कुछ कह भी नहीं सकते,
कहे बिन रह भी नहीं सकते,
कर ले दीदार तेरा इक बार उनका,
बिन देखे रह भी नहीं सकते,


[09/04, 1:28 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: कुछ दिखते, कुछ छिपते से तुम हो,
मेरे खयालों में, लिपटे से तुम हो,
तमन्ना है, देखे, हर पल हम तुमको,
दिखते यू क्यूं, बस पूनम को तुम हो।।


[09/04, 10:17 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: तुझको देखा, तो कुछ यूं, ख्याल आया,
मैंने खुद को, तुझ में समाए पाया।।


[09/04, 1:55 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जाने कैसे, वो मोहब्बत करती है,
शिकन दिखती नहीं, और फिकर भी करती है।।


[09/04, 9:40 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: तेरी बातों में, कुछ उलझ सा गया,
दिल अपना, वही तेरे करीब, मै भूल गया ।।


[10/04, 12:00 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: तेरी खामोशी भी, तुझसे ज्यादा बतियती है,
जो तू नहीं कहती, वो बोल जाती है।।


[10/04, 12:01 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: तू नहीं होती, फिर भी तेरी आवाज आती है,
तेरा हाल ए दिल, बयां कर जाती है।।


[10/04, 12:01 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: इक बार, जवाब पूछा होता,
दिल से अपने तूने जरा,
वो भी, ढूंढता है अक्सर,
ख्वाबों से मेरा पता।


[10/04, 12:23 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: वक़्त है, मगर मागशूल सब है,
इस जमाने को, हुआ क्या है,
जो कभी, सफ़र में साथ थे,
वो गुमशुदा, गुमनाम क्यूं है।।


[12/04, 1:19 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: इश्क़ है, तो बेसब्री आज भी, उतनी ही होगी,
हर मिनट में चेक करोगे, वो कब ऑनलाइन होगी।।


[12/04, 1:19 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कौन कहता है, इश्क मुझसे जुदा है,
वो तो मेरी ही गली का, बाशिंदा है।।


[12/04, 2:11 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: खुदा ने वक़्त दिया है, समझो,
थोड़ा इश्क़ करलो,
कल फिर दुनियादारी में खो जाओगे,
वो सामने होंगे, और तुम निकल जाओगे।।


[12/04, 8:17 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: हां, दुनिया में तुम्हे, मैं ही लाई हूं,
कहां अलग हो अब, तुममें मैं समाई हूं,
किया रोशन, जहां मेरा तुमने,
तुम मेरी रोशनी, मैं तुम्हारी परछाई हूं ।।


[13/04, 7:39 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: पहले जो हम हुआ करते थी,
वो अब मैं हो गए,
पता ही नहीं चला कब,
रिश्ते गुमशुदा हो गए।।


[15/04, 12:01 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: Waah…

दिल तो दिल ही है, उम्र का हिसाब नहीं रखता,
जब लग जाता है, जेहन में कुछ और नहीं रहता।।


[15/04, 12:11 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: इतने कलाकारों में हम कहा,
हमारी लाइन वही शुरू होती है,
जहां हमारी, शायरी खड़ी होती है🤣🤣🤣🤣


[15/04, 12:11 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: प्यार को बेबसी ना समझो,
कितनो को हिम्मत बख्श्ता है,
मांझी एक मिसाल है,
अकेला शख्स, पूरा पहाड़ तोड़ सकता है।।


[15/04, 12:17 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: ख्वाबों को हकीकत बनाने को, जूनून चाहिए,
ये मोहब्बत है, इसमें गुस्सा नहीं, सुकून चाहिए।।


[15/04, 12:37 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: यही तो भूल करते हो,
इश्क़ को कमजोरी समझते हो।।


[15/04, 12:37 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: अब दर्द समझ में आ गया तुम्हारा,
क्यूं तुम यू रुसवा रहते हो,
जिन्हे सुर, ताल, राग का शौक है,
उन्हें बेताल भंवरे सुनने को देते हो।।

🤣🤣🤣🤣
[15/04, 12:37 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: ये दुनिया सारी, मोहब्बत से ही तो चल पाती है,
कभी मां, कभी बहन, कभी इश्क़ बन सामने आती है।।


[15/04, 12:37 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: बारिश पसंद है, मगर आंधी से डरते है,
मोहब्बत भी कुछ यूं ही है,
जब होती है, तो सुकून मिलता है,
वरना उसके नाम से डरते है।।


[15/04, 12:53 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: इश्क़ ना मिटाना है, ना मिट जाना,
इश्क़ है, उसकी खुशी में, अपनी खुशी को पाना,
उसको पाना नहीं, उसके हो जाना।।


[15/04, 12:59 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: हमे नजर अंदाज कर सको,
हम वो तो नहीं,
वादा है, जब तन्हा होगे,
जेहन में तेरे होंगे।।


[15/04, 1:10 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: मतलब तो हर बात में छिपा होता है,
इतने परेशां क्यूं हो,
मोहब्बत भी तो एक मतलब है,
किसी को पाना है,
किसी को किसी का बन जाना है।।


[15/04, 1:10 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कब तक पुराने निशानों को,
कुरेद जख्म बनाते रहोगे,
यूं तो बंदो से क्या,
खुदा से भी, खुद दूर रहोगे।।


[15/04, 1:10 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: इश्क़ ना मिटाना है, ना मिट जाना,
इश्क़ है, उसकी खुशी में, अपनी खुशी को पाना,
उसको पाना नहीं, उसके हो जाना।।


[15/04, 1:13 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: खुश हो, आज खुद की,
खुद से मुलाक़ात हो गई,
सुधार सकते है गलतियां,
जो कभी, अनजान राहों में हो गई।।


[15/04, 1:15 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: सच तो सच है, मैं कैसे छोड़ दू,
क्यूं इक झूठ की खातिर,
खुद से ही रिश्ता तोड़ दूं,
इश्क़ है सच्चा, तो अपनाएगी,
वो सच सुनकर ही,
झूठ की नींव पर रखे रिश्ते,
कुछ पल में, दम तोड देते है।।


[15/04, 3:53 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जब भी देखता हूं, कुछ अधूरी सी लगती है,
ये भी कुछ, मेरी जिंदगी सी लगती है।।


[15/04, 3:56 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कभी तन्हा, कभी मगशूल,
कभी ख्वाबों में, किसी में गुम,
पसंद भी है, क्यूं की बस मैं हूं,
शिकवे है, यार करीब नहीं है।


[15/04, 4:36 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: सबसे किसे रिश्ता निभाना है,
हमे कौनसा, हुजूम को, साथ ले जाना है


[15/04, 7:14 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: उम्र का कहा हिसाब रखते है,
जिस्म नहीं, दिल पर, नजर रखते है,
एक बार बस मुस्कुरा दो,
तेरे गुजरने पर, आज आशिक फिसलते है।।


[16/04, 10:55 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: चलो, संवार ले, जीवन को थोड़ा,
गुनगुना ले, एक गीत नया,
माना मजबूरी है, अच्छा ही तो है,
मिला है जो, वक़्त थोड़ा।।


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: क्यूं ना आज, शायरी में ही बात की जाए,
सबकी कुछ ना कुछ, तारीफ की जाए


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कॉन्फिडेंस ही तो है,
और बचा ही क्या है मुझमें,
खुदाया, खुदा को पुकारा,
खुदाई भेज दी, खुदा ने।।


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: और वो है, कि अपने दिल के रजिस्टर में,
मेरी हर रोज, एबसेंट भरती है😉🤣🤣


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जरा ध्यान से, मेरा वाला जग गया,
तो कोहराम मच जाएगा,
या तो मैं निकाला जाऊंगा,
या ग्रुप खाली हो जाएगा।।🤣🤣🤣


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: वो दिन में बन बन,
रात में चांद की तरह चमकता है


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जब से तुआई है, वीरान कहा दिल ये मेरा,
हर सांस में है अब, तेरा आना जाना।।


[16/04, 1:23 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: अरमानों को यूं ही, ना कर कुर्बान अपने,
सजदे करेंगे, तेरी राह में, खुदा के बाशिंदे।।।

देव
[17/04, 2:45 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: तेरी याद, मेरे जेहन में,
कुछ इस तरह से है बसी,
मै खुद को भुला हूं,
दुआ करता हूं, बस तेरी ख़ुशी।।

तुमसे प्यार भी करता हूं

तुमसे प्यार भी करता हूं,
और तुमसे डरता भी हूं,
डरता यूं हूं कि कहीं,
मेरी कोई बात,
तुम्हें दुख ना पहुंचाए,
और तुम हो ही इतनी प्यारी,
हर किसी को मोहब्बत हो जाए।।

देव

बता तेरा कहां है, आशियाना

चांदनी सा शीतल, तेरा रूप,
खो जाए जहां, पल में यूं,

भुला दे गम हजार, चुटकी में
नजर तुझपे पड़े, जो कुछ पल में,

निर्मल जल सा है, तेरा आना,
खुदा की दुआओ का, साथ लाना,

तेरी वो मद्धम में गुनगुनाना,
हवा का, तेरी ताल पे, बहते जाना,

जहां कौनसा है, जरा बताना,
बता तेरा कहां है, आशियाना।।

देव

धड़कने तेरे दिल की, सुन सकता हूं मैं,

धड़कने तेरे दिल की,
सुन सकता हूं मैं,
तेरे आंसू, जो ना बहे
देख सकता हूं मैं,

तेरे ख्वाबों में, बसी तस्वीर,
उकेर दूं, कागज पर पल में,
तेरे अरमानों की कश्ती,
खींच सकता हूं मै,

तेरी पाना, नहीं है,
जुनून मेरा,
तेरे दिल में, मोहब्बत मेरी,
भर सकता हूं मैं।।

देव

मोहब्बत मेरी, उसकी ही, इक इबादत है।

माना तुझसे मैंने,
मोहब्बत की है,
ऐसी कौनसी मैंने,
गलती की है,
तेरी अदा, तेरे अंदाज़,
पर हूं मैं फिदा,
तुझसे, बस तेरी,
मोहब्बत की ही,
सिफारिश की है,

माना, है ख्वाब तेरे,
तेरी ये जिंदगानी है,
तुझे चाहने वालो की,
बहुत कहानी है,
ये दिल तुझ पर आ गया,
क्या कसूर मेरा,
तुझसे चाहता हूं बस,
मैं, दिल ये तेरा,

माना, मैंने भी ठोकरें,
जहां की खाई है,
तभी मुझको, समझ,
अब जाकर ये आईं है,
तू भी वक़्त है सम्हाल जा,
जरा इश्क कर ले,
नहीं मिलती, हर बार,
बेवफ़ाई है,

माना, खुदा तेरा
मेरे खुदा से है खूबसूरत,
तेरी हर सांस में है,
छुपी उसकी इबादत,
मगर मेरा खुदा, खुद
इश्क ही सिखाता है,
मोहब्बत मेरी, उसकी ही,
इक इबादत है।

देव

कुछ पल की, मुलाक़ात ही काफी है

कुछ पल की,
मुलाक़ात ही काफी है
बस वी पास हो,
और रख के सिर अपना,
पहलू में तेरे,
बैठा रहूं,
तेरे मखमल से हाथो को,
थाम हाथो में अपने,
पूरे जहां की मोहब्बत,
लुटा तुझ पर दू,
कुछ पल में,
मोहब्बत तुझे दू,
उमर भर की,
तेरे चेहरे की शिकन,
अपने माथे पर लू,
तू बस, इक बार
इश्क़ मुझ से कर ले,
तमाम उम्र, तेरे पहलू में,
गुजार मैं दूं।

देव

दियो में लौ जलाने का है।।

कब तक इसे अंत मानोगे,
ये तो नई शुरुआत है,
पुरानी पीढ़ी के लिए सीख,
नई के लिए, नया अध्याय है,

ये वक़्त सीखने का है,
भुलाने का नहीं,
साथ आने का है,
छोड़ कर जाने का नहीं,

अनजान राहों पर अपने,
ढूंढने वाले मुसाफिरों
अब वक़्त घरों में रखे,
दियो में लौ जलाने का है।।

देव

सच तो सच है

सच तो सच है, मैं कैसे छोड़ दू,
क्यूं इक झूठ की खातिर,
खुद से ही रिश्ता तोड़ दूं,
इश्क़ है सच्चा, तो अपनाएगी,
वो सच सुनकर ही,
झूठ की नींव पर रखे रिश्ते,
कुछ पल में, दम तोड देते है।।
देव

घड़ी कब तक चलेगी

घड़ी कब तक चलेगी,
जाने कब रुक जाएगी,
सांसों की लय, ना जाने,
कब मध्धम पड़ जाएगी,
मगर, एक बात तो,
तय है यारो,
जब भी, मोहब्बत का नाम,
लिया जाएगा,
किसी की जुबान पर,
हमारा नाम, जरूर आएगा।।

देव

मुकाम ए मोहब्बत कुछ और होगा।।

क्या होगा, गर आग के दरिया में कूद जाएंगे,
मोहब्बत को खुद ही रुसवा कर जाएंगे,
मोहब्बत है, तो मोहब्बत की,
खुशी को समझो जरा,
मजबूरी उसकी भी होगी,
नहीं वो पास यहां,
मोहब्बत है तो, बस
मोहब्बत करके दिखलाओ,
उसके दर्द को, अपना जरा बनाओ,
फिर अहसास कुछ और होगा,
मुकाम ए मोहब्बत कुछ और होगा।।

देव

यकीं करो, प्यार तुम्हे भी हो सकता है।।

दिल की आवाज, दिल ही सुन सकता है,
प्यार सुकून है,
प्यार जिंदगी है,
प्यार चेहरे की हसीं है,
प्यार एक यकीं है,
प्यार सागर है,
प्यार गागर है,
कोई कैसे, प्यार से यूं दूर रह सकता है,
यकीं करो, प्यार तुम्हे भी हो सकता है।।

देव

थोड़ा मुस्कुरा लो।

थोड़े वो अधूरे, थोड़े हम अधूरे,
कहा होते है इस जहां में,
सबके ख्वाब पूरे,

अधूरे ख्वाबों को मिला कर,
एक पूरा जहां बसा लो,
यूं ही ना रहो तन्हा यारो,
थोड़ा मुस्कुरा लो।।

देव

पास ना होकर भी, कितने करीब है

कुछ पल ही सही, बड़ी अच्छी नींद आई,
जैसे, पतझड़ में, बहार ने , ली अंगड़ाई,

उसके आगोश में घुस कर सोया था,
वो तो नहीं थी, पर उसके ख्वाबों में खोया था,

दिल बड़ा बैचैन था, अब सुकून है,
वो पास ना होकर भी, कितने करीब है।।

देव

कब रिश्ते गुमशुदा हो गए

पहले जो हम हुआ करते थे,
वो अब मैं हो गए,
पता ही नहीं चला कब,
रिश्ते गुमशुदा हो गए।।

मिसालें देता था जमाना, जिन
मुसाफिरों की, वो राहें बदल, खो गए
पता ही नहीं चला,
कब रिश्ते गुमशुदा हो गए,

खोखली कर, अपनी ही बुनियाद,
घर मकान, मकान खंडहर हो गए,
पता ही नहीं चला,
कब रिश्ते गुमशुदा हो गए,

देव

इस जमीं की, तू अप्सरा है।।

तेरी ये मंद मंद मुस्कुराहट,
देती है, दिलो पर दस्तक,

और कांधे पर, झूलते ये बाल,
कर देते है, कितनो का, हाल बेहाल,

खुदा से क्या पूंछू, खास क्या है,
तेरे लिबास का, अंदाज जुदा है,

और ये, रोशनदान से, झांकता सा लाल रंग,
छुपी इसमें भी कहीं, तेरी अदा है।।

लोग कहते है, तू इंसान है,
सच कहूं, इस जमीं की, तू अप्सरा है।।

देव

इस बार नहीं रोका मैंने

इस बार नहीं रोका मैंने।।

वो जाने लगा, नहीं टोका मैंने,
इस बार नहीं, रोका मैंने,

यूं तो, निकाह उससे, किया मैंने,
शर्तों पर उसकी, हां कहा मैंने,
संग उसके रही, प्रियतम बन कर,
मजबूरी थी, विश पिया मैंने,

इस बार नहीं रोका मैंने,

यूं तो, काफी थी, गलतियां की,
हक से बढ़ कर, उसकी इच्छा थी,
अभिलाषा नहीं, वो लालच था,
रंक से राजा बन जाना था,
सब कुछ, चुपचाप सहा मैंने,

इस बार नहीं रोका मैंने,

हद तब थी, जब कलंक लगा,
मां का अधिकार, था छीन लिया,
पत्नी पर ना जब, विश्वास रहा,
बस इतना कहा, जा, माफ किया मैंने,

इस बार नहीं रोका मैंने।।

देव
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हां, इश्क़ तो है उससे

हां, इश्क़ तो है उससे,
मगर बोलने से डरता हू,
कुछ तो होंगे, ख्वाब उसके,
तोड़ने से डरता हू,

यूं तो वो भी समझती है,
मगर चुप रहती है,
शायद, मेरे कुछ बोलने का,
इंतेज़ार वो करती है,

देव

मैं आज तुम्हे गाने को कहती हूं

हां, मैंने है कहा था तुम्हे,
प्लीज़, कुछ भी करना,
मगर गाना मत,
बहुत प्यार करती हूं तुम्हे,
चाहे मेरा, मजाक बनाना,
मगर गाना मत,

नहीं जानती थी,
कि इक दिन ऐसा आएगा,
बेसुरो की आवाज पर भी,
वाह वाह निकला जाएगा,
ये दिल, एक सुरीला गाना,
सुनने को तरस जाएगा,
और ना जाने कब,
उन गानों में भी,
मजा आएगा,

इसीलिए, मैं अपने शब्द,
वापस लेती हूं,
है प्रियतम,
मैं आज तुम्हे गाने को कहती हूं।।

देव

उठ चल बड़, उड़ती चल


ये जमीं तेरी, आसमां तेरा,
रास्ते तेरे, मंजिले तेरी,
तू बस उठ चल बड़,
तू बस उड़ती चल,

प्यास जब भी लगेगी,
चिलचिलाती धूप में,
ठोकरें, भी मिलेंगी,
रास्ते, अनजान से,
तू गिरके, उठकर चल,
तू बस उड़ती चल,

बढ़ेगी जब बिंदास तू,
पड़ेंगे, फंदे जज्बात के
पतंग बन, होगी आसमां पे
रोकेगी, डोरी रिश्तों की,
तोड़ कर, सारे बंधन,
तू बस उड़ती चल

ये जमीं तेरी, आसमां तेरा,
रास्ते तेरे, मंजिले तेरी,
तू बस उठ चल बड़,
तू बस उड़ती चल,

देव

मगर पा नहीं सकते

बेसबर सी जिंदगी, उलझी हुई राहें,
चाहते तो बहुत कुछ, मगर पा नहीं सकते,

वक़्त भी बेबस सा, दिखता है, आजकल,
वो दिखते तो है, मगर, आ नहीं सकते,

सपने भी, जरा कशमेकश में है,
जो चाहते है, वो दिखा नहीं सकते,

नींद, क्यूं कर आएगी भला,
ना वो करीब है, ना दूर जा सकते,

जिंदगी, मौत से बदतर है यहां,
खुदा दिखता तो है, मगर पा नहीं सकते,

आज लकीरों से पूछ ही ली,
खता हमने,
बोली, दे तो सकते हो,
मोहब्बत पा नहीं सकते।।

देव

पर विश्वास है, मेंरे लिए काफी है,

वक़्त मेरा, बस मेरे परिवार के लिए होता है,
हरदम मेरे घर में, साथ में खाना होता है,

दोस्त बनाता हूं, मगर भीड़ से डर लगता है,
जिन्हे घर नहीं ला सकता, उन्हें तुरंत गुड बाय कहता हूं,

जितना कमाता हूं, बस यही है,
पर विश्वास है, मेंरे लिए काफी है,

हां, इज्जत भी बहुत कमाई है मैंने,
नजरे झुका सके मेरी, दम नहीं किसी में,

देव

किस तरह तूने है जीवन जिया

आज तेरा दर्द महसूस किया,
किस तरह तूने है जीवन जिया,

घर की चारदीवारी में, गुजरी उम्र सारी,
और एक बार भी, उफ्फ ना किया,

सलाम है तुझको, तेरे प्यार को,
जो कुछ भी तूने, सबके लिए सहा।।

देव

तू आज भी अक्सर याद आता है,

We get many friends, but there are very few, who are really close to heart and always there as part of you.

Yogi, these lines are for us..

तू आज भी अक्सर याद आता है,
मेरा तुझसे, एक अलग ही नाता है,

याद है ना तुझे, बचपन के वो किस्से,
बैठते थे ड्योढ़ी पर, देखते थे ट्रेनें,

सोचते थे, कुछ होता है, तो क्यूं होता है,
शायद, जो होता है, अच्छा ही होता है,

आज फिर, तेरी याद में बैठा हू यार,
काश, तू होता साथ, करते हम बाते चार,

कुछ तू बोलता, कुछ मै बतियाता,
फलसफे जिंदगी के, और समझ जाता।।

देव

सपने ही तो है, देख लो जरा,

सपने ही तो है, देख लो जरा,
कौन रोक रहा है,
है ये तुम्हारे ही, क्या पता,
कुछ सच हो जाए, और
ना भी हुए तो क्या,
एक सुकून तो मिलेगा,
वास्तविकता से कुछ पल ही सही,
छुटकारा तो मिलेगा,
वरना, कहा होते है, आजकल,
सपने भी हसीन,
जरा सा सोचते है खुद का,
तो हो जाते है, गमगीन,
ढूंढ़ते फिरते है खुशी,
जमाने के हालातो में,
राह जाते है तन्हा,
अक्सर, खुद रातों में,
इसीलिए, कुछ सपने,
देख लो अपने, क्या पता
कुछ सच हो जाए।।

देव

कुछ पल निकाल ही लेते है, खुशी के,

कुछ पल निकाल ही लेते है, खुशी के,
छाए हो, चाहे बादल, गमों के,
चेहरों पर, कुछ रौनक उधार देते है,
थोड़ी ही सही, हसीं बांट देते है,

कुछ खुशनुमा, बहुत गमगीन बातो के,
रोज गुजारे है, अनगिनत लम्हे, यादों में,
कुछ लम्हों को याद, बना लेते है,
थोड़ी ही सही, हसीं बांट देते है,

नहीं याद, मुझे, कब मैं रोया था,
मगर, याद है, तन्हा बहुत मैं सोया था,
निंदे अब कुछ, उधार देते है,
थोड़ी ही सही, हसीं बांट देते है।।

देव

पापा, प्लीज़ सोने दो,

बहुत जग लिए, थोड़ा खोने दो,
पापा, प्लीज़ सोने दो,

करना क्या है, ना स्कूल जाना,
ना पार्क का बहाना,
खेलने को वक़्त तो है,
पर दोस्तो का कोई पता ना,
थोड़ा सुस्ताने दो,
पापा, प्लीज सोने दो,

बस हम ही तो है,
कर लेंगे मिल कर सारे काम,
कुछ भी खा लेंगे,
जो भी दे दोगे, बना के आप,
अभी सपनों में खोने दो,
पापा, प्लीज़ सोने दो।।

देव

कब तक चुप रहती

Just heard, about struggle of one of my friend went through, and her smile, Lough was hiding so much pain, I never thought. I have tried to express through words but don’t think, is able to express whole..

Her name is Neeti..

Neeti, stay blessed 🙏

कब तक चुप रहती,
शब्दों की मार सहती,
इसीलिए, प्रतिकार किया,
मैंने उसको छोड़ दिया,

भोर भयनाक, दिन सुना,
राते अश्रुधार में निकलती थी
कोई वक़्त नहीं होता था, जब
मेरी आह नहीं निकलती थी,
प्यार जो था, वो ख़तम हो गया,
रिश्ते धीरे धीरे टूटे,
आस बची थी, इक दिन टूटी
मोह था,जो वो त्याग दिया,
मैने उसको छोड़ दिया,

नन्ही नन्ही पारियां मेरी,
मिलने को तरसती थी,
पर उसकी आवाज जब आती,
डर डर कर वो पलती थी,
सूरज जब भी, ढलता होता,
किसी कोने में दुबकती थी,
जाने कैसी किस्मत थी कि,
पिता का प्यार ना नसीब हुआ,
मैंने उसको छोड़ दिया,

जाने कितनी रातें मैंने,
उस दरी पर बिताई थी,
संग सामान के, गलती से,
शादी में वो आईं थी,
बिछा के उसको, अब भी अक्सर
सोती हूं, चौबारे पर,
आने जाने वाले पूछे,
जरा बतादो, ये अनमोल है क्या,
मैंने उसको छोड़ दिया,

अब बस मैं हूं, मेरा संकल्प,
मेरी परिया, मेरा संयम,
जीती हूं मैं, खुद का जीवन,
दिन सुहाना, रातें पावन,
अब नहीं मैं, आश्रित किसी पर,
दिल मेरा, है प्यार भी, जी भर,
ना दर्द है अब, ना दुख रत्ती भर,
ना अफसोस मुझे, क्या मैंने किया
अच्छा किया, जो,
मैंने उसको छोड़ दिया।।

कब तक चुप रहती,
शब्दों की मार सहती,
इसीलिए, प्रतिकार किया,
मैंने उसको छोड़ दिया,

देव

तू गर, तब बेनकाब होती

चमन ये रंगीन नहीं होता,
तुझसे जो रूबरू, नहीं होता,
फिजा कहा, मुस्कुराती,
गर, तू ना खिलखिलाती,
शराब, बे शराब होती,
रूबरू, तुझसे ना होती,
ग़ालिब, भूल जाता शायरी,
तू गर, तब बेनकाब होती।।

देव