यारो का साथ

शराब ही तो है यारो के बाद
जो मुझे पहचानती है
दो घूंट गले से उतरती है
और मेरे दर्द की, हमसफ़र बन जाती हैं

याद, वो ही दिलाती है वक़्त गुजरा हुआ
जब, तेरी जुल्फों में गुजरती थी शाम मेरी
आज, भी जाम जब भी पीता हूं, मिलता हूं
तेरे फसाने, वो पुराने गाने सुनता हूं

और, जब तक, ना बहक जाऊ,
बस पीता हूं
बस एक शराब, और यारो का साथ है जो जीता हूं।

देव

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