हमारा कोई नाता नहीं है

गुज़ारिश है तो कर रही थी वो,
कि अपना लो मुझे,
यूं ही कैसे, जिसे लाए हो,
सात जन्मों का वादा करके,
पल में अलग कर दिया,
ना पूछा, ना बातें की,
और दिल से जुदा कर दिया,
बताओ, ऐसा कोई करता है क्या,
मैं तो आईं थी, सब कुछ छोड़ कर,
बस, तुम्हारे सहारे,
लाड़ली थी उस घर की,
बड़े अरमानों से किया था विदा,
कहा था, अब नया घर मेरा होगा,
पर, कभी लगा ही नहीं,
बस, यहां भी, और वहां भी,
एक मेहमान बन कर रह गई हूं,
और अब तो, तुम भी अपने नहीं रहे,
क्यूं, ऐसे ही, तोड़ सकते हो, वो कस्मे,
वो साथ निभाने के वादे,
क्या, लेश मात्र भी प्रेम नहीं बचा,
जो बीच मझधार में, छोड़ दिया मुझे,
या मेरा कसूर बस इतना है,
कि मैंने तुम्हें समझा अपना है,
नाम भी मेरा कहा रहा,
सब कुछ तो तुम्हे दे दिया,
और अब कहते हो,
हमारा कोई नाता नहीं है।।

देव

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