लाल लिबास

लाल लिबास, औरफोन पकड़ने का अंदाज़,लगता है, कुछ खास है,मुखड़े पर, कुछ अलग मुस्कान है, तुम्हारे जेहन में भरे,वो हजारों सवालात,लबों से निकलती,वो फुर्र फुर्र बात,देखो है ये खुलने को बेताबअभी भी ये लब,बताते है अब भी,है वहीं हालात, मगर, अब नया अंदाज़ है,यूं लगता है मानो,तुम्हे किसी का इंतजार है,बेसब्र सी आंखे, उससेमिलने को … Continue reading लाल लिबास →

सपना मेरा, पल में, टूट गया

उसके लिए तो बस, वो कुछ शब्द थे,और मेराअरमान, चूर हो गया,सपना मेरा, पल में, टूट गया। कुछ ही तो वक़्त हुआ था,उसने मुझे लव यूं, कहा था,और में छोड़ कर सब,उसके आंगन में आईं थीं,अभी तो मेहंदी भी कहा,रंग छोड़ पाई थी, कि,उसका रंग पता चल गया,सपना मेरा पल में टूट गया। यूं तो, … Continue reading सपना मेरा, पल में, टूट गया →

हां, अब वो बदल गई है

हां, अब वो बदल गई है,अब उसकी, मुश्किलें कम हो, गई है, वक़्त था, जब वो, मजबूर हुआ करती थी,साथ तो यूं, सब थे, मगर तन्हा रहा करती थी,दर्द को उसके, समझे, कोई था ना वहां,उसके वजूद की परवाह, थी है किसे,मगर,हां, अब वो बदल गई है,अब उसकी, मुश्किलें कम हो, गई है। बहाने अब … Continue reading हां, अब वो बदल गई है →

अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है

कोशिश करी बांधने की,बंध नहीं पाते है,अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है। कभी सुन कर हाल ए दिलयारो का,कभी, किस्से मोहब्बत केमारो का,सब्र नहीं रख पाते है,अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है। दर्द छिपा है, यहां,हर नजर में,हर नजर, सैलाब है,आंसुओ का,अक्सर, बह जाते है,अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है। जीता भी हूं मैं,कभी हारा … Continue reading अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है →

इंतेज़ार तो उन्हें भी है

इंतेज़ार तो उन्हें भी है,मुलाक़ात का हमसे,ना वो इकरार करते है,ना इजहार करते है। पढ़ लेते है अक्सर, जेहन में,मंडराते सवालतों को,ना वो पूछते हैना जिक्र करते है। मोहब्बत है, उन्हें भी,इश्क़ है हमसे उन्हें,ना वो कहते है,ना खत में लिखते है।। देव 16 may 2020

अक्स

अक्स देख कर पूछा मैंने,तू तन्हा क्यूं है,जब जिंदगी है, तेरे पास,तो रुसवा क्यूं है, अक्स बोला,जब भी देखता हूं, तो बसतू ही दिखता है,तू भी सच है या बसएक धोखा है।। देव 15 may 2020

आइना

यूं तो आइना, रोज ही देखती है,मगर, काफी अरसे बाद,आज, वो घर से बाहर जा रही है,शायद, उससे मिलने की,घड़ी आ रही है, थोड़ी बैचैन, और बहुत खुश है,माथे पर, हल्की सी शिकन है, कभी इस दराज,तो कभी उस दरवाजे को खोलती,कभी पास में बनी अलमारी के,कपड़ों को खंगेलती, एक एक ड्रेस को,खुद पर लगाती,नपंदागी … Continue reading आइना →

तेरे इश्क़ ने मुझे, जीना सिखा दिया

तेरे इश्क़ ने मुझे, जीना सिखा दिया,पहले उधेड़ना, अब बुनना सीखा दिया। यादों के ताने बाने से, सिले है जो ख्वाब,ख्वाबों को हकीकत में, बदलना सीखा दिया। डर, डर मुझे भी लगता था, जुदाई का अक्सर,तेरी बातों ने मुझे, निश्चल बना दिया। देव 15 may 2020

मुझे सुकून मिलता है

लिखता हूं मैं, क्यों कि,मुझे सुकून मिलता है,पड़ते है वो, क्यों कि,उन्हें खुशी मिलती है, हां, अक्सर रूला भी,देती है, कविता मेरी,दर्द के किस्से अक्सर,,जब लिख देता हूं। देव 15 may 2020

रे अक्स को कागज पर, उंकेरूं कैसे

तेरे अक्स को कागज पर, उंकेरूं कैसे,खुदा ने, रंग ही नहीं, वो बनाए,तेरे हुस्न की तारीफ में क्या मैं लिखूं,जो लब्ज़ मिले, वही कमतर नजर आए। तू तो बस यू ही, कह देती है,देखो, ये तस्वीर, अच्छी नहीं ली तुमने,तेरी उसी तस्वीर से घायल,दीवाने हजार नजर आए। यूं ही नहीं, आते है हम महफ़िल में,कुछ … Continue reading रे अक्स को कागज पर, उंकेरूं कैसे →

मेहंदी

देखो, तुम्हारे चेहरे की मुस्कुराहट जो कुछ देखते ही बनती है, इतने वक्त से तुम्हें देख रही हूं लेकिन पता नहीं तुम्हारे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई थी तुम ना जाने सबसे कब दूर हो गई थी,आज बरसों बाद तुमने मुझे अपने हाथों में लगाया तुम नहीं जानती आज मैं कितना खुश हूं … Continue reading मेहंदी →

जो सानिध्य तेरा पाया है

बड़े इत्मीनान से खुदा ने,तुझे बनाया है,बस,रूप ही नहीं, रूह,को भी, तेरे सजाया है, यूं ही नहीं, ये स्वरूप,तूने पाया है,खुदाई को, खुदा जमीं,पर यूं लाया है, और तूने जो, बांधे है,कलाई में धागे,उनकी किस्मत के धनी है,जो सानिध्य तेरा पाया है, देव 14 feb 2020

सब्र अब बचा कहा है

सब्र अब बचा कहा है,ना वक़्त है ज्यादा अब,फुरसत तो, है बहुत,मगर तलबगार है कम, रुखसत हो गई है मोहब्बत,यारियां, कही छूट सी गई,महफ़िल में शराब तो है बहुत,जाम की आवाजे, गुम हो गई, वादे, कहीं गुम हो गए,बातें, हजार बाकी है अब,कहना तो बहुत कुछ है,सुनने के शौकीन, कम है अब।। देव 14 may … Continue reading सब्र अब बचा कहा है →

वक़्त का वादा नहीं

वक़्त मुनासिब हो, हर वक़्त,वक़्त का वादा नहीं,वक़्त पे मिलते है जो,वक़्त पे छोड़ जाते भी है, कभी भीड़ है, कभी अधीर है,सब वक़्त का ही खेल है,जो बेवक्त था, संग में खड़ा,वही वक़्त का, भागीदार है, वक़्त दिखा दे पहले, वक़्त से,नहीं वक़्त कर सकता है ये,वक़्त पर, वक़्त पहचान लो,तो वक़्त पे, बचा … Continue reading वक़्त का वादा नहीं →

वो बचपन था, मगर कहा कम था

It's not about, where you study, it's all about with whom, and if we have done something, what makes you Lough, life long… Here is another part of my childhood… वो बचपन था, मगर कहा कम था,सरकारी स्कूल, पर थी बड़ी कूल,यही कोई तीसरी या चौथी क्लास थीमगर, मस्ती पूरी भरी, हुई थी, थोड़ा क्लास … Continue reading वो बचपन था, मगर कहा कम था →

तुम कहा गई, दिल में बसी हो अब भी

अभी, कल ही, की तो बात है,मिली थी तुमसे, बड़े दुलार से,हाथ फेरा था, सिर पर मेरे,और हजार दुआए दे डाली थी पल में, तुम्हारी मुस्कुराहट में, कोई,भेदभाव नहीं था, तुम्हारे संवाद में,बस प्यार ही प्यार भरा था,और जब गले, तुमने मुझे अपने लगाया,मेरे दिल को, बस इत्मीनान ही था, तुम्हारे प्यार में बस, अपनापन … Continue reading तुम कहा गई, दिल में बसी हो अब भी →

जिंदगी है वो, कहा रुकती है वो

दिल ही तो है,पल में बनता, पल में बिगड़ता है,जो है नहीं करीब,उन्हें याद करता है,जो है, उनसे कहा बात करता है, बेसब्री भी मुझमें,दिल ने है तो दी है,वरना कहा, इंतेज़ार करता था मैं,वो रहती तो हमेशा,है पास मेरे,मगर, तसव्वुर से उसके,डरता था मै, कहीं, कहीं बुरा तो,नहीं मान वो लेगी,कहने से हाल ए … Continue reading जिंदगी है वो, कहा रुकती है वो →

राखी का धागा पाती हूं।

जाने कब से तमन्ना लेकर बैठी हूं,कोई तो मेरे सपनो का राजा होगा,उसके आने से, रोशन मेरा जीवन होगा,मगर, कमबख्त, वो कसम याद आ जाती है,जो कभी, बचपन में दिलवाई थी,समस्त भारतीय मेरे भाई बहन है,भरी स्कूल में, मास्टर साहब के,कहने पर खाई थी, सोच कर ही, परेशान हो जाती हूं,सपने मोहब्बत के देखती हूं,मगर … Continue reading राखी का धागा पाती हूं। →