सफ़र ही तो है, ये जिंदगी

सफ़र ही तो है, ये जिंदगी,
बस चल रही है, राहें ना जाने,
कितनी, हर मोड़ पर मिल रही है,

मिल रहे है मुसाफिर, कुछ अनजान,
कुछ पहचान, करते जा रहे है,
कुछ आगे बढ़ते जा रहे है,
कुछ छूटते जा रहे है,

हाथ बहुत है, मगर
थामे किस तरह,
जो हमको चाह रहे है,
उनसे दूर जा रहे है,
जिन्हे हम चाह रहे है,
वो कुछ और चाह रहे है।

ठहरे ज़रा जब हम,
लगी ठहरी सी जिंदगी,
देखा जब मुड़कर से फिर,
प्यारी थी जिंदगी,
हम फिर भी जाने क्यूं,
कोसे जा रहे थे,
और देखो, जो रह गए थे कहीं,
वही पास आ रहे थे।

देव

02 August 2020

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