बस वो ना थी!

जो मांगा, मिला कुछ ज्यादा ही मुझे,
मगर मुराद में, कुछ बचा रह गया।

बारिशें मय की, घनघोर है यहां,
जी भर के पीये मगर प्यासा रह गया।

चलती रही बातें, सहर से शाम तक,
रुखसत में लगा, किस्सा बाकी रह गया।

हर कोई तो है, मेरे करीब देखो जरा,
बस वो ना थी, और तन्हा मैं रह गया।।

देव

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