धड़कन भी अक्सर,
रौब जताती है,
सांसों से ज्यादा, तेरी नाम पर,
वो जो धड़क जाती है।
पूछ ही लिया, दिमाग ने,
उसने गर ना अपनाया,
तो क्या रुक जाएगी,
बोली, पगले, एक बार
जो ताल मिल गई,
तो क्या मैं भूल पाऊंगी।
दिल ने कहा, नहीं आता मुझे,
यूं खाली रहना,
बस जायेगा, कल यहां कोई और,
समझ घर अपना,
बोली, नए और नई ताल,
मैं भी सीख जाऊंगी,
मगर अक्सर, उसके
नाम पर भी, धड़क जाऊंगी,
मैं, दिमाग नहीं, जो
याद करके, भूल जाऊंगी,
मैं धड़कन हूं, हर नए सुर को
अपनी धुन में मिलाऊँगी,
हर ताल को तुम्हे,
ताउम्र, गौर से सुनाऊंगी।।
देव
10/11/2020, 4:53 pm