यूं ही नहीं, हर साल, दिवाली आती है।

स्याह रात को, रोशन कर जाती है,
यूं ही नहीं, हर साल, दिवाली आती है।

रोशन बस्ती में, कुछ सूने घर है,
रुकी हुई सी, कुछ दिलो की धड़कन है,
चुपके से एक आहत, दिया जला जाती है,
यूं ही नहीं…..

कोई हकीकत, ख्वाब सी जीता है,
कोई हक़ीक़त में, ख्वाब से डरता है,
ये रात सबको, पल पल जगाए जाती है,
यूं ही नहीं…

चलो, वीरान चेहरों पर, हंसी लाते है,
चलो, हाथ थाम, कुछ कदम चल आते है,
खुशी बाटने से, कम नहीं हो जाती है,
यूं ही नहीं…

स्याह रात को, रोशन कर जाती है,
यूंस्याह रात को, रोशन कर जाती है,
यूं ही नहीं, हर साल, दिवाली आती है।

रोशन बस्ती में, कुछ सूने घर है,
रुकी हुई सी, कुछ दिलो की धड़कन है,
चुपके से एक आहत, दिया जला जाती है,
यूं ही नहीं…..

कोई हकीकत, ख्वाब सी जीता है,
कोई हक़ीक़त में, ख्वाब से डरता है,
ये रात सबको, पल पल जगाए जाती है,
यूं ही नहीं…

चलो, वीरान चेहरों पर, हंसी लाते है,
चलो, हाथ थाम, कुछ कदम चल आते है,
खुशी बाटने से, कम नहीं हो जाती है,
यूं ही नहीं…

स्याह रात को, रोशन कर जाती है,
यूं ही नहीं, हर साल, दिवाली आती है।

देव


15/11/2020, 2:40 pm

देव

15/11/2020, 2:40 pm

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