हम नशेबाज है।।

अदा ही तो है, और क्या,
यूं ही नहीं फिदा, तुझ पर जहाँ।
अधखुली नज़रे और होले से मुसकुराना
यही तो छीनता है, नींद का खजाना।
जुल्फें जब भी, तेरी खुलती है,
नशा फिज़ा में, कुछ अलग घोलती है।
करीब तेरे, कैसे रहें, तू ही बता,
लोग पहले ही, कहते हमे नशेबाज है।।
देव
16/01/2021, 7:08 pm

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