अक्सर, उसकी तस्वीर देखता रहता हूं

क्या बताऊं, क्या हुआ,
अक्सर, उसकी तस्वीर देखता रहता हूं,
चाहता तो बहुत कुछ हूं लिखना,
कहीं बदनाम वो, ना हो जाए,
बस, लिख कर, मिटा देता हूं,
मिली थी यही, कुछ मास पहले,
मिलने से पहले, जरा सी तकरार भी हुई,
चलता रहा सिलसिला, यू ही
पता ही नहीं चला, कब इस दिल में,
मोहब्बत की दस्तक दे, बस गई,

ना पता उसको, हाल ये मेरा,
ना इजहारे प्यार ही, करना मुझको,
ना देना नाम, इस रिश्ते को,
ना जंजीरों में जकड़ना उसको,

वो बिंदास है, बिंदासी ही,
खूबसूरती है उसकी,
जीती है, अपनी शर्तो पर,
ना गुरूर, ना गुस्सा है,
उसके चेहरे पर,

लोग कहते है, क्यू नही,
तुम प्यार का इजहार करते हो,
इल्म तो हो, उस मेहबूबा को,
के तुम उससे प्यार करते हो,

इल्म करा के उसे, मैं अपना प्यार,
नहीं खोना चाहता,
जो मजा, उसको यू ही देखने में है,
बाहों में भर, उसे नहीं खोना चाहता,
माना, मेरा प्यार, एक तरफा है,
पर, यकीन है, दिल तो उसका भी धड़कता है,
वक़्त आने पर, बताऊंगा उसे,
ये दीवाना, कितनी मोहब्बत,
उससे करता है।।

देव

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