तमाशा बना रखा है

तमाशा बना रखा है,बस, मुद्दा चाहिए,और शुरू हो जाते है,किताबो को रख ताक में,रोड पर आ जाते है,जैसे, पढ़ाई नहीं,बस पॉलिटिक्स करनी है,देश को कुछ दे तो ना सकते है,बस, मौका मिलते है,नारेबाजी करनी है, बेदिमाग लोग, बेकार ही,तवज्जों लेकर बैठ जाते है,कुछ रुपयों के खातिर,पल में बिक जाते है,खाते है मुल्क का,और मुल्क के … Continue reading तमाशा बना रखा है

सेल्फ़ी मेरी

हो हो सेल्फ़ी मेरी, हां सेल्फ़ी मेरी,सुबह सुबह की सेल्फ़ी मेरी,सबको क्यूं डराती है,कजरारे नैनो में भी क्यूं,तारीफ एक ना आती है, नज़रों से ही वार करू,एक पल में, हजार बेहाल करू,बन लट्टू, आशिकों की टोली,पल में अपने नाम करूं, पर सुबह सुबह, अम्मा सबकी क्यूं मर जाती है,कजरारे नैनो में भी…. गाल गुलाबी, होठ … Continue reading सेल्फ़ी मेरी

शाम भी कुछ यही कर रही है

शाम भी कुछ यही कर रही है,वो शायद यही कही है, कहीं यहीं है, यूं ही नहीं, फिजा में, लालिमा है फैली,कुछ और नहीं, मुस्कुराहट है तेरी, तू छाव है, धूप भारी जिंदगी में मेरी,तेरे संग, बिता दू, जिंदगी मेरी, चंद पल, बिताना, तेरे आगोश चाहता हूं,इक बार, तेरे करीब आना चाहता हूं, देव

ये शाम की लालिमा

ये शाम की लालिमा, और तुम्हारा मुस्कुराना,सर्द हवाओं का, तेरे घर से, टकरा कर आना, मदमस्त कर देती है, फिज़ाओं को,तेरा अहसास करती है, कुछ पल को दूर कहां, तू है करीब ही यही कही,बैठ तकता हूं, मैं राह तेरी, माना शाम है, पर सुबह भी तो आएगी,तेरे आने की, घड़ी कभी तो आएगी।। देव

अक्सर, उसकी तस्वीर देखता रहता हूं

क्या बताऊं, क्या हुआ,अक्सर, उसकी तस्वीर देखता रहता हूं,चाहता तो बहुत कुछ हूं लिखना,कहीं बदनाम वो, ना हो जाए,बस, लिख कर, मिटा देता हूं,मिली थी यही, कुछ मास पहले,मिलने से पहले, जरा सी तकरार भी हुई,चलता रहा सिलसिला, यू हीपता ही नहीं चला, कब इस दिल में,मोहब्बत की दस्तक दे, बस गई, ना पता उसको, … Continue reading अक्सर, उसकी तस्वीर देखता रहता हूं

देखो, नया साल आ रहा है

देखो, नया साल आ रहा है,नई खुशियां लेकर,भूल जाओ, जो हुआ,हंसो, खिलखिलाते जाओ,दोस्तो के संग, हुए होंगेगिले शिकवे सही,कुछ वक़्त है, करो कोशिश,फिर वही रिश्ते बनाओ,मिलते है, बड़ी मुश्किल से यार चार,होता है, दोस्ती में भी प्यार,माना, ठोकरें खा चुके है कई,पर क्यूं बदले खुद को,बड़ी मेहनत से बने है, ये हम यार,अब जो वक़्त … Continue reading देखो, नया साल आ रहा है

गिले, शिकवे, शिकायतें

गिले, शिकवे, शिकायतें,और ना जाने, कितनी ही बातें,क्यूं घर कर जाती है,जरा सी बात पर, ना जाने,कितनी दूरियां बन जाती है, कहने को तो अपना कहते है,मगर, अपना मानते कहां है,हर बात पे रूठना, आसान समझते है,पल में रिश्ता, तोड़ जाते है, समझते है नहीं, समझना जिनको नहीं,समझ से परे, जिनकी समझदारी होती है,तोलते है, … Continue reading गिले, शिकवे, शिकायतें

मां, तू नहीं बस मां है मेरी

अपने सांचे में ढाल, मुझे बनाया तूने,दर्द हजार सह, संवारा है मुझे,गीले में खुद सो, सुलाया है मुझे,लोरियां गा कर, सपनों में, पहुंचाया है मुझे, हां, सच कहते है, परछाई हूं मैं तेरी,तू कहती है, तुझसे बेहतर हर बात है मेरी,तेरी हर सांस में, बसी हूं मैं,मेरे हर रोम में, दिखती है तू, वो तू … Continue reading मां, तू नहीं बस मां है मेरी

जबां तो वो भी मेरी ही बोलती है

जबां तो वो भी मेरी ही बोलती है,पर आवाज में उसके, कुछ और ही बात है,मदहोश, हो जाए, बस पल सुनने से,मिला है उसको हुनर, औरसुनने को, बार बार, हर दिल बेताब है, उसका, किस्सों को, सुनाना,हर, वाक़िए को गौर से समझना,अपनी ही बात पर, शर्माना,अपना चेहरा, हाथो से छिपाना,फिर जोर से हंसकर, अपना डर … Continue reading जबां तो वो भी मेरी ही बोलती है

प्याज का तो हाल ही ना पूछो

लगता है जमाने की नजर लगा गई,तभी तो चाय में चीनी भी तेज हो गई है, और प्याज का तो हाल ही ना पूछो,उसकी तो किस्मत खुल गई है,पल में ही, जाने लॉटरी लग गई है,कहा सोना चांदी, इतराते थे अपनी किस्मत पर,वही प्याज लाखो के भाव बिक रही है। अभी कल ही की तो … Continue reading प्याज का तो हाल ही ना पूछो

आशिकों के मचलने के लिए

तेरी तिरछी नजर,तेरा तकना बेझिझकऔर ये लहराते बाल,बलखाती हुई सी तेरी चाल,तेरी मुस्कुराहटतेरे क़दमों की आहट,तेरे कंधे से लटकता पल्लू,तेरी आंखो का ये जादू,तेरी कमर में लटकता ये रुमालतेरा झुकी नजरो से पूछना, क्या हालकाफी है, हां काफी हैकतल करने के लिए,आशिकों के मचलने के लिए।। देव

बचपन का ये बेफिक्र, तेरा रहना

तू परी है, मेरे आंगन में उतरी है,तेरे आना, हमारे जीवन की,सबसे बड़ी खुशी है, मेरे जिगर का टुकड़ा है तू,मेरी जान, मेरा मान है तू,तू है तो मैं मैं हूं,मेरी परछाई है तू, परछाई, हां, मेरी परछाई है तू,पर मुझसे कहीं बेहतर,तेरे साथ चलती हूं मैं,तुझसे लिपटकर, तेरी हर अदा पर, हूं मैं फिदा,दुआ … Continue reading बचपन का ये बेफिक्र, तेरा रहना

ना इजहार ए इश्क ही होता है

कर्ज और फर्ज के बीच में,ये दिल का मर्ज ही तो है,जो जिंदा रखता है,बस, इक अदद देख लेते है सूरत तुम्हारी,दिन और खूबसूरत गुजरता है।। कहां मिलती है, तसल्लीबस तेरी तस्वीर देखने से,तेरे दामन ले रख कर सिर,मिले कुछ पल तो, बिताने के, ख्यालों पर भी तो पहरा,लगा रखा है जमाने में,ना खुल कर … Continue reading ना इजहार ए इश्क ही होता है

वादियां मुझे पड़ लेती है

कैसे वादियां मुझे पड़ लेती है,मेरी जिंदगी, खुद बयां करती है, वो देखो, बादल भी कहते कहानी,मेरे दिल के हालात, बोले अपनी जुबानी, वो जो सूरज की किरणे, बनाती है रास्ता,मेरे आने वाला, दिन होगा, और भी अच्छा, पहाड़ों का बेतरतीब बिखरना,था में कभी, असमंजस में खोया, और वो, थोड़ी ही सही, हरियाली है कहती,अभी … Continue reading वादियां मुझे पड़ लेती है

बिता देती जिंदगानी

ये वादियां, और हाथ में चाय की प्याली,कुछ वक़्त ही सही, थोड़ा बैठो तो खाली, गुजारो कुछ पल, समंदर में पहाड़ों के,सफेदी की चादर, ओडे जो बैठे, निहारूं इन्हे या, खो जाऊं इनमें,ख्वाहिश है मेरी, इनकी हो जाऊ पल में, काश, कोई होता, जो पीता साथ प्याली,सच कहती हूं मैं, बिता देती जिंदगानी।। देव

मेरी दोस्ती को वो,प्यार समझ बैठे है

मेरी दोस्ती को वो,प्यार समझ बैठे है,समझाएं किस तरह उनको,हम तो खुद, इश्क़ में, जले बैठे है, पता नहीं, कब से,हमसे आस लगाए बैठे है,कैसे बताएं उनको,हम पहले से, कितनी बारलूटे बैठे है, कहता हूं, इश्क़ ना करो मुझसे,मैं मोहब्बत ना कर पाऊंगा,ज़ख्म अभी भरे नहीं,हम नासूर लिए बैठे है, दर्द तुम खुद को भी … Continue reading मेरी दोस्ती को वो,प्यार समझ बैठे है

यूं ही अगर रूठते रहोगे, तो कौन मनाएगा

यूं ही अगर रूठते रहोगे, तो कौन मनाएगा,मन्नते करते करते, हर कोई थक जाएगा, तन्हा थे कभी, फिर तन्हा रह जाओगे,बिस्तर भी, एक दिन, बेगाना हो जाएगा, आंसू बहने से पहले, जो पल में पहुंच जाते थे कभी,लाख बुलाने पर भी, सम्हालते नहीं कोई आएगा, छोर दो, अहम तो रावण का भी ना चला,जीलो खुश … Continue reading यूं ही अगर रूठते रहोगे, तो कौन मनाएगा

मौसम भी बड़ा, बेमानी हो गया

मौसम भी बड़ा, बेमानी हो गया,हम तन्हा है, और ये रूमानी हो गया, फितरतें लगती हैं, बेईमान क्यूं हमे,क्यूं छोटा सा दिन, और ये लंबी रातें,क्यूं दिल खाली, रूहानी यादें,क्यूं कोई नहीं करीब, और शाम सुहानी दे गया, चंद लम्हे, बस, चंद लम्हे दे दे साथ के,वो, जो दूर है, नहीं पास में,उसके कंधे पर … Continue reading मौसम भी बड़ा, बेमानी हो गया

छोड़ जायेंगे, गर तुम रूठ जाओगे

छोड़ जायेंगे, गर तुम रूठ जाओगे,नहीं मनाएंगे, गर हर बार रूठ जाओगे, कौन करता है, इंतेज़ार आजकल,मिले है यार, मुश्किल से चंद यहां,तुम जो नखरे, इतने दिखाओगे,बड़ जाएंगे आगे, गर कभी गिर जाओगे, माना, तुम नाजुक हो बड़े,हर बात दिल पर लेते हो,यूं ही, गर हर बात अखरती है तुम्हे,हर बात से, अनजान खुद को … Continue reading छोड़ जायेंगे, गर तुम रूठ जाओगे

बड़े कंफ्यूज से है वो

बड़े कंफ्यूज से है वो,क्या करे, क्या ना करें,सोच में मगशूल से है वो, कभी लगता है, बड़ जाए दो कदम आगे,कभी ठहरे, ठिठक कर खड़े से है वो, कह दे, हाल ए दिल, या दिल कोई और ढूंढे,इसी कश्मेकष में, पड़े है वो, दिन के हर पल में, बदलती है सोच,चाय की प्याली पर … Continue reading बड़े कंफ्यूज से है वो