थाम कर हाथ तेरा, बैठा रहूंगा….

वो एहसास ही कुछ अलग था,
जब हाथ पकड़ कर तुम्हारा, में बैठा था,
जाने कैसा जादू सा चल गया था,
दिल का सारा डर निकल गया था,
मेरी हथेली में, तुम्हारी अंगुलियां
मुझे ढांढस दिला रही थी
और तेरी सांसों की आवाज, जैसे
तेरी आंखो में रुके आंसुओ की,
कहानी बता रही थी,

तेरी दिल की धड़कने,
पहले कभी इतनी साफ कहा सुनी,
हां, सुना था मैंने,
तेरे जज्बातों की लहरों में,
उठे तूफान को बता रही थी,
आंसू तो मुझे आ रहे थे,
मगर लगा, रोए तू जा रही थी,

तुमने कहा था, तुम्हे
पता भी नहीं, प्यार
क्या होता है,
यही तो प्यार है,
जिसका पता नहीं होता है,
बस हो जाता है,
हम रिश्तों में इसे खोजते रहते है,
और दिल किसी से लग जाता है,
वो जब सामने होता है,
तो ध्यान कहीं और नहीं जाता है,
दूर जाते ही उसके,
यादों का सिलसिला
चालू हो जाता है,
कुछ कहने को, दिल बहुत चाहता है,
और जताने में मोहब्बत,
दिल घबरा जाता है,

हां, मैं प्यार करता हूं तुझसे,
मगर जानता हूं, बड़ा मुश्किल है,
तेरे जीवन में, जगह बनाना,
तेरा यकीन जीत पाना,
ऐसा नहीं कि तुझे मुझ पर यकीन नहीं,
पर मुश्किल है तेरा, दोस्ती को,
प्यार में तब्दील कर पाना,

फिक्र ना कर, मेरा प्यार बस रूहानी है,
इसमें नहीं भूख, कोई जिस्मानी है,
गर नहीं चाहती, रिश्ते को कोई नाम देना,
बस, एक दोस्त बन,
मुझसे प्यार करती रहना,
जब भी चाहे, मेरे कंधे पर,
रख सिर अपना,
अपने दिल का बोझ हल्का करती रहना,
जब भी मंडराए तेरे जीवन में,
दुख के बादल,
इस यार को आवाज देना,
कुछ पल, मेरी बाहों में सुस्ता लेना,

तब भी, थाम कर हाथ तेरा
बैठा रहूंगा,
समेट लूंगा गम सब तेरे,
बदले में बस, खुशी दूंगा।।

देव

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