ये कशमकश कैसी।

गर, मोहब्बत है, तो बगावत कैसी,
ज़माने से, घबराने की बात कैसी
क्यूं है शक खुद पर, खुद के प्यार पर,
खुद ही से, खुद की शिकायत कैसी।
गर, मोहब्बत है, तो सब हासिल है,
इश्क़ में, सब पाने की हिम्मत है,
क्यूं डर है और क्या तुम खो दोगे,
जिन्दगी मे, ये कशमकश कैसी।
देव
03/02/2021, 1:09 pm

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