लेकर हाथ सबका!

अखण्ड ज्योति लेकर,
सब साथ में चले,
लेकर हाथ सबका,
सब साथ में चलें।

मंजिल है दूर लेकिन,
हौसले बुलंद है,
बह रहा है खून लेकिन,
मुस्कान मंद मंद है।
रुके नहीं मुड़े नहीं
लक्ष्य साधने चले।

लेकर हाथ सबका,
सब साथ में चलें।

धूप चिलचिलाती है,
राते काफी सर्द है,
सभी एक जैसे नहीं,
जबान में भी फर्क है,
भीड़ में भी हटकर,
भीड़ के साथ में चले।

लेकर हाथ सबका,
सब साथ में चलें।

देव

10/11/2020, 12:16 am

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