खुश तो है, दिखाने को,फिक्र को छिपा रखती है,उसकी अंगुलियों अक्सर,आपस में खेलती रहती है, जज्बातों को अपने काबू कर,दुनिया से मुलाक़ात करती है,अक्सर अपने जेहन में,सपनों का, जहां वो रखती है देव
Month: February 2020
बेफिक्र सी जिंदगी उसकी
बेफिक्र सी जिंदगी उसकी,और लम्बा ये सफ़र,ना वक़्त मिलता है पैमाने का,ना फिक्र करती है जमाने की, रुक कर, बस देख लेती है,हर आने जाने वाले को,गुजराती है शामे उसकी,अक्सर झरोखे में घर के, कभी निकल भी जाती है,अफसानों का थैला लेकर,बोलती यूं ही नहीं वो,किस्से है सुनाने को बहुत।। देव
Random thoughts feb2020
मेरी बज़्म में छिपे थे जज्बात उनके,ना वो मंजूर हाल कर सके,ना ज़रा सी वाह निकली। देव वो ना भी मिली, तो गम ना कर,पाने की उसको है, जिद ना कर,खुशी उसकी हो, यही इश्क़ है पगले,तू बस दिल से, मोहब्बत कर।। देव रोक रही, दीवारों उसको,जो कभी तूने ही बनाई थी,आसान नहीं, उस पार … Continue reading Random thoughts feb2020
भर लो मोहब्बत की कहानी से
खो गया था वो कहीं,अभी कुछ दिनों की बात है,बिखरे पड़े थे यहां वहां,उसकी याद के जज्बात थे, छोड़ कर, बंधन थे सारे,कितना खुश हूं मैं यहां,क्यूं तुम रोती हो, याद में,जीलो जीवन, अपना वहां, बात अपनी का कर वो,जाने कहा गुम हो गया,देकर मुझे नया रास्ता,खुदा में लीन हो गया, फिर मिली, इक जिंदगी,फिर … Continue reading भर लो मोहब्बत की कहानी से
मैं, मैं ना रहा
मैं, हमेशा से, ऐसा नहीं था,ये तो वक़्त ने, मुंह मोड़ लिया,कुछ पल के लिए, मैं, मैं ना रहा, मुझे भी अरमान थे,किसी को चाहूं,शिद्दत से भी ज्यादा,और चाहा भी तो था,पर, कहीं गुम सा हुआ,जिंदगी के सफ़र में,के संग चले का, सफर ही ना रहा,मैं, मैं ना रहा, दर्द इतने मिले,राह में मोहब्बत के,तन्हा … Continue reading मैं, मैं ना रहा
हां, कह रही हूं,इसका मतलब हां भी नहीं है
कुछ वक़्त में, तुमने,थोड़ी इज्जत कमाई थीयही कारण है, मेरे मुंह से तुम्हेना नहीं निकल पाई थी,तुम्हारी जिद के आगे,में हताश नजर अाई थी,मगर इसका मतलब, हां भी नहीं है,हां, कह रही हूं,इसका मतलब हां भी नहीं है, माना, मेरे जीवन में कोई और नहीं है,माना, मैं भी, चाहती हूं, पाना किसी को,माना, मुझे प्यार … Continue reading हां, कह रही हूं,इसका मतलब हां भी नहीं है
अब ना सुनने की, आदत भी डाल लो..
क्या मैं, बस एक वस्तु हूं,जो चाहे, जैसे चाहे, यूज करें,क्या मेरे ख़्वाब, मेरे अरमान नहीं है,जो चाहे, अपने हिसाब से प्यार करे, क्या मेरा कोई मान नहीं,क्या मेरा कोई आत्म सम्मान नहीं,क्यूं मैं किसी को नहीं चाह सकती,क्यूं मैं, अपना वर नहीं पा सकती, युगों से, धकेला है मुझे समाज ने,कभी दोस्ती, कभी परंपरा … Continue reading अब ना सुनने की, आदत भी डाल लो..
उसके घर तक का, सफर याद है…
अब कहां रास्ते याद रहते है,बस, एक उसके घर तक का,सफर याद है,उसकी गली में लगा वो,लैंप पोस्ट याद हैउसके इंतेज़ार में,बिताए वो पल याद है,उसकी हसीं सुनने वाले,वो मंजर याद है,हां, उसका मजाक में पागल,बोलना याद है,उसके हाथ का बनाया,वो परांठा याद है,कॉफी को, एक नए अंदाज़ में,बनाना याद है,हां, अब कहा रास्ते याद … Continue reading उसके घर तक का, सफर याद है…
प्यार है नाम, उसकी खुशी पर, कुर्बान हो जाने का
उसने बस इतना कहा था,उसे पता नहीं, प्यार होता क्या है,और जैसे सब बदल सा गया,मेरा प्यार, उसके लिए और बढ़ गया, कैसे बताऊं, प्यार होता क्या है,मैं तो बस इतना बता सकता हूं,मैं क्या समझता हूं, साथ में जब वो हो, तू सुकुं मिलता हो,उसकी आवाज सुनने को, दिल करता हो,वो पास हो, या … Continue reading प्यार है नाम, उसकी खुशी पर, कुर्बान हो जाने का
थाम कर हाथ तेरा, बैठा रहूंगा….
वो एहसास ही कुछ अलग था,जब हाथ पकड़ कर तुम्हारा, में बैठा था,जाने कैसा जादू सा चल गया था,दिल का सारा डर निकल गया था,मेरी हथेली में, तुम्हारी अंगुलियांमुझे ढांढस दिला रही थीऔर तेरी सांसों की आवाज, जैसेतेरी आंखो में रुके आंसुओ की,कहानी बता रही थी, तेरी दिल की धड़कने,पहले कभी इतनी साफ कहा सुनी,हां, … Continue reading थाम कर हाथ तेरा, बैठा रहूंगा….
भाई, कभी रो भी लिया करो
मैंने पहले भी कहा है,अब भी का रहा हूं,मर्द को भी दर्द होता है,और मर्द बन दबा कर दर्द रखते हो,तो कभी अपने अंदर की,औरत को भी जगा लिया करो,भाई, कभी रो भी लिया करो।। माना, तुम्हे कंधे नहीं मिलते,मिलती है तो बस, तुम्हारेदर्द पर हसने वाले चेहरे,अक्सर, हमारे पास रहने वाले,होते है दर्द सुनने … Continue reading भाई, कभी रो भी लिया करो
हमारी दोस्ती की कसम दी
शायद, कुछ ग़लत समझ लिया था,मैंने उसकी दोस्ती को, प्यार समझ लिया था, और लगा, पागलों की तरह, उसे प्यार करने,चाहने लगा था, बेइंतेहा उसे मन ही मन में, लगी आदतें कुछ, धोका खाने के बाद जो,उसकी मोहब्बत में, वो गलियां छोड़ दी, हिम्मत करके, जब किया, इजहार हमने,उसने अफसोस जता, हमारी दोस्ती की कसम … Continue reading हमारी दोस्ती की कसम दी
शायद, ये मेरा शहर नहीं है
शायद, ये मेरा शहर नहीं है,शायद, ये मेरा शहर नहीं है,यहां तो प्यार को, ब्रांड्स कीतराजू में तोला जाता है,जो ज्यादा महंगा गिफ्ट देता है,वही, शायद क्या प्यार दे पाता है,मेरे शहर में तो वक़्त में मायने थे,घंटो बागीचे में बैठ,बस एक दूसरे के देखने,के भी बहुत मायने थे,मोहब्बत बस आंखो सेबयां हो जाती थी,आई … Continue reading शायद, ये मेरा शहर नहीं है
तेरे सपनों में खो जाता हूं
जरा बता तो सही, क्या तू भी,कभी सोचती है, मेरे बारे में,क्या, सुनते हुए तराने,मैं आता हूं, तेरे ख्यालों में, वक़्त था, जब मैं कुछ और था,नहीं था शौक मुझे नगमो का,अब सुनता तो हूं, पर कहा सुन पाता हूं,अंतरा आते ही, तेरे सपनों में खो जाता हूं।। देव
पर ये दिल भी तेरा ठिकाना है
आज नहीं तो कल, कभी तो वो मानेगी,मेरे प्यार को वो, कभी तो पहचानेगी, क्यूं छोड़ दूं उम्मीद, यही तो एक सहारा है,माना, दूर तुम रहती हो, पर ये दिल भी तेरा ठिकाना है।। देव
जिंदगी के हर हालात में खुश हूं,
हर बात में खुश हूं, हर हाल में खुश हूं,जिंदगी के हर हालात में खुश हूं, सब साथ है मेरे, उस साथ में खुश हूं,तन्हाई का आलम क्या, खुद के साथ खुश हूं, वो नहीं मिली, पर कहीं तो होगी,जहा होगी, उसके हालात पे खुश हू, मिल भी गई, और मिलती नहीं,उसके ताउम्र इंतज़ार में … Continue reading जिंदगी के हर हालात में खुश हूं,
ख़्वाब
बस एक टेलीफोन कॉल ही तो किया था उसने और वह इतना परेशान हो गई, जाने कबसे वह उसके बारे में सोचे जा रही थी। उसका चेहरा जरा बुझा बुझा सा दिख रहा था। आंखों में आंसुओं की बूंदें इस तरह से जमा हो गई कि लगा अब तो बस सैलाब आने वाला है। हाथ … Continue reading ख़्वाब
बस, इक बार, मुझपे तू यकीं तो कर
तहेदिल से, बेपनाह, चाहूंगा तुझे,बस, इक बार मेरा यकीं तो कर,हर सांस में, होगा नाम तेरा,तू इक बार, मुझपे यकीं तो कर, पहले भी कर चुका हूं इश्क़, किसी सेपहले भी हदें पार करी मैंने पाने को उसे,पहले भी, सालो सांस में, आवाज थी उसकी,फिर ना निकली कभी, जब एक बार टूटी,हरकते मैंने करी है, … Continue reading बस, इक बार, मुझपे तू यकीं तो कर
अब, पैरों की जूती नहीं मानो
बस हंस कर क्या बोल ली,कुछ बातें क्या कर ली,थोड़ा मजाक, थोड़ा गुनगुनाना,एक शाम साथ, पब में बिताना,थोड़ा पीना, थोड़ा बेहकना,थोड़ी सी शरारत करना,और बस, मान लिया,की मेरी हां है,कितनी गलतफहमियां पाल रखी है,हमारे जरासे खुलेपन ने,तो जान ले रखी है,ना को ना कहा समझते है,ना कहने पर भी, पीछे पड़ते है,तुम चाहते हो, मतलब … Continue reading अब, पैरों की जूती नहीं मानो
पैरों की जूती नहीं मानो
बस हंस कर क्या बोल ली,कुछ बातें क्या कर ली,थोड़ा मजाक, थोड़ा गुनगुनाना,एक शाम साथ, पब में बिताना,थोड़ा पीना, थोड़ा बेहकना,थोड़ी सी शरारत करना,और बस, मान लिया,की मेरी हां है,कितनी गलतफहमियां पाल रखी है,हमारे जरासे खुलेपन ने,तो जान ले रखी है,ना को ना कहा समझते है,ना कहने पर भी, पीछे पड़ते है,तुम चाहते हो, मतलब … Continue reading पैरों की जूती नहीं मानो